ओम राउत द्वारा निर्देशित फिल्म ‘आदिपुरुष’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म के रिलीज होने बाद से इस पर विवाद शुरू हो गया है। फिल्म के डायलॉग, किरदार, वीएफक्स को लेकर लोग फिल्म की आलोचना कर रहे हैं। सबसे ज्यादा डायलॉग को लेकर फिल्म की आलोचना हो रही है। फिल्म में कुछ डायलॉग एसे हैं, जिसे सुनकर आप अपना माथा ही पकड़ लेंगे। मतलब आप इसे छपरी भाषा कह सकते हैं। डायलॉग सुनकर आप खुद शर्मिंदा महसूस करने लगेंगे कि कैसी बातें कही जा रही हैं।
इस तरह की कथाओं के लेखन में जो सहजता और सरलता विचारों की चाहिए, वह इसके संवादों में है नहीं।

ऐसे लिखे गए संवाद
रावण का एक राक्षस सैनिक बजरंग को अशोक वाटिका में जानकी से बात करते देख लेता है। वो बजरंग से कहता है, ये तेरी बुआ का बगीचा है क्या जो हवा खाने चला आया। मरेगा बेटे आज तू, अपनी जान से हाथ धोएगा।’
फिल्म के एक सीन में इंद्रजीत, बजरंग की पूंछ में आग लगाने के बाद कहते हैं- ‘जली ना? अब और जलेगी। बेचारा जिसकी जलती है वही जानता है।’ इसके जवाब में बजरंग कहते हैं, ‘कपड़ा तेरे बाप का, तेल तेरे बाप का, आग भी तेरे बाप की, और जलेगी भी तेरे बाप की।’
फिल्म के एक सीन में जब लंका से लौटकर बजरंग आते हैं तो एक सवाल के जवाब में वे कहते हैं ‘ बोल दिया, जो हमारी बहनों को हाथ लगाएंगे, उनकी लंका लगा देंगे।’
रावण को अंगद ललकारते हुए एक सीन में कहते हैं, ‘रघुपति राघव राजा राम बोल और अपनी जान बचा ले, वरना आज खड़ा है कल लेटा हुआ मिलेगा।’
शेष (लक्ष्मण) पर वार करने के बाद इंद्रजीत कहता है, ‘मेरे एक सपोले ने तुम्हारे इस शेष नाग को लंबा कर दिया। अभी तो पूरा पिटारा भरा पड़ा है।’
विभीषण एक सीन में रावण से कहता है, ‘भैया आप अपने काल के लिए कालीन बिछा रहे हैं।’
एक और सीन में रावण, राघव के लिए कहता है, ‘अयोध्या में तो वो रहता नहीं, रहता वो जंगल में है और जंगल का राजा तो शेर होता है, तो वो राजा कहां का रे।’
आब ये कहेंगे कि किस हिसाब के डायलॉग हैं भाई? क्योंकि ये रामायण के हिसाब के डायलॉग तो नहीं हैं। आदिपुरुष की कहानी त्रेता युग की है, जिसे फिल्म के मेकर्स ने अपने ऊट पटांग डायलॉग्स से कलयुगी बना दिया है। यही उनकी भारी गलती है। भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम थे, रावण ज्ञानी था। उनके और उनके साथ के किरदारों के मुंह से अजब-गजब बातें सुनना अजीब लगना लाजिमी है।